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Monday, 8 February 2016

RAAT-BHAR

तुम ख़्वाबों में आते रहे रात भर

हसरतें जवाँ होती रही रात भर ।

बादलों में छुपा चाँद मुस्कुराता रहा

चाँदनी बिखरती रही रात भर ।

नींद में डूबे पत्ते लिपटे रहे शाख़ से

रात रानी महकती रही रात भर ।

मिट्टी पर रेंगती रही बारिश की बूँदे

ख्वाइशें नहाती रही रात भर ।

3 comments:

Anup Pandey said...

बहुत सुन्दर रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास